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'रूह से रूह तक'... समीक्षा एक अनोखी प्रेम कहानी की

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एक लेखक की पहचान उसकी रचना होती है. आज पहली बार मै एक ऐसी किताब की समीक्षा करने जा रहा हूँ, जो हिन्दी भाषा में रची गयी है. इस किताब की शीर्षक है, 'रूह से रूह तक', और इसके लेखक हैं विनीत बंसल. इससे पहले की हम मूल कहानी में जाएं, आइये, ज़रा लेखक महोदय के बारे में जानते हैं. औपचारिक रुप से विनीत जी ने ख़ुद कही से लिखना नहीं सीखा है पर युनिवर्सिटीज़ और कालेजो में विद्यार्थियो को लेखन-कला सिखाने जाते हैं. इन्होने अंग्रेज़ी में सात और हिन्दी में दो किताबे लिखा है. विश्व भर में ख्यात पहलवान महाबली खली के साथ मिलकर आप ने उनकी जीवनी भी लिखा है. इसके अलावा और भी नामचीन हस्तियों के साथ इन्होने काम किया है और कर रहे हैं. यूं तो भारतीय स्टेट बैंक में ऑफिसर हैं पर इतना लिखने और पढ़ने का समय कहाँ से निकालते हैं, ये पूछने पर कहते हैं- सपनो में. इनका मानना है की किताबें समाज और व्यक्तित्व की आईना होये हैंऔर शायद यही कारण है की वह अपनी इसी सोच को शब्दों की माला में पिरो कर किताबों के माध्यम से ज़िन्दगी में प्यार और रिश्तों की अहमियत को संजीदगी से दिखने की कोशिश करते हैं. अब हम आते हैं मू...